Monday, April 5, 2010

sachchai jeewan ki

सच्चाई जीवन की ;
मोती की माला टूटने परर हम झुक-झुक कर उसे समेटते है,बार-बार गिनते है की कोई मोती कम तो नहीं, पर अपने किसी का ह्रदय कितनी बार टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर गया, इसकी किसी को परवाह नहीं. दूसरे के आंसू पोंछने को तत्पर कभी कोई नहीं सोचता की मेरे घर में मुझे सबसे अधिक प्यार करने वाला/वाली की आँखों में मेरे कारण नमी तो नहीं? क्या मेरे अपने के स्वतंत्र जीवन का मई हर पल बंधक तो नहीं?????????????????
..........................shaliniagam

2 comments:

  1. यथार्थ ----सच है रिश्ते कहीं दरकते जा रहे हैं --रिश्तों की प्रगाढ़ता /जीवन्तता का आधार पावन प्रेम ,सम्मान ,आपसी विश्वास में कमी आई है -आपने गंभीर /सामयिक/सामाजिक समस्या उकेरा है -बधाई .-

    ReplyDelete
  2. यथार्थ ----सच है रिश्ते कहीं दरकते जा रहे हैं --रिश्तों की प्रगाढ़ता /जीवन्तता का आधार पावन प्रेम ,सम्मान ,आपसी विश्वास में कमी आई है -आपने गंभीर /सामयिक/सामाजिक समस्या उकेरा है -बधाई .-

    ReplyDelete